مَن یَشاءُ و مَن یُؤتَ الحِکمَةَ فَقَد اُوتِیَ خَیرًا کَثیرًا وما یَذَّکَّرُ اِلّا أُولُوا الَأَلْبابِ۔
{ वह जिस को भी चाहता है , हिकमत प्रदान कर देता है , और जिस को हिकमत प्रदान कर दी जाए , उस को मानो बहुत सी ख़ैर प्रदान कर दी गई हो , और इस बात को बुद्धि वाले लोगों के अतिरिक्त कोई और नहीं समझता है ।